सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले और जनहित याचिकाएँ
1️⃣ जातिगत गाली के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर जातिगत गाली सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई, तो यह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।
🔹 मामले की पृष्ठभूमि
✔️ आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 18 नवंबर, 2024 को आरोपी दीपक कुमार ताला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
✔️ एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने 18 अप्रैल, 2024 को शिकायतकर्ता को जातिसूचक शब्द कहे।
✔️ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जातिगत टिप्पणी सार्वजनिक रूप से नहीं की गई, इसलिए यह एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रथम दृष्टया अपराध नहीं बनता।
✔️ कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की।
📌 सुप्रीम कोर्ट का तर्क:
➡️ एससी/एसटी अधिनियम की धारा 2(1)(आर) और 2(1)(एस) के तहत आरोप तभी संज्ञेय अपराध बनेगा, जब गाली सार्वजनिक रूप से दी गई हो।
➡️ शाजन स्कारिया बनाम केरल राज्य (2024) मामले में भी यही सिद्धांत लागू किया गया था।
2️⃣ सुप्रीम कोर्ट में सट्टेबाजी एप पर प्रतिबंध लगाने की याचिका
युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
🔹 याचिकाकर्ता की मांगें
✔️ सट्टेबाजी एप पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील।
✔️ इन एप्स का प्रचार करने वाले क्रिकेटरों, बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय अभिनेताओं के खिलाफ कार्रवाई।
✔️ सख्त कानूनों के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी को अवैध घोषित करने की अपील।
⚠️ ऑनलाइन सट्टेबाजी के खतरनाक दुष्प्रभाव
✔️ मानसिक तनाव और आर्थिक बर्बादी के कारण कई युवाओं की आत्महत्याएँ।
✔️ अकेले तेलंगाना में 2024 में 978 युवाओं ने आत्महत्या की।
✔️ क्रिकेटरों और अभिनेताओं के प्रचार से युवा गुमराह हो रहे हैं।
➡️ सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
3️⃣ अपहरण और आपराधिक धमकी का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपहरण और धमकी देने के आरोप केवल अनुमानित हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान साबित करना होगा।
🔹 मामले की पृष्ठभूमि
✔️ शिकायतकर्ता एक अनुसूचित जाति से संबंधित व्यक्ति है।
✔️ आरोपी मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा हुआ था, जहां भूमि विवाद के चलते विवाद उत्पन्न हुआ।
✔️ शिकायतकर्ता को अपहरण कर कई दिनों तक बंधक बनाकर धमकाया गया और जमीन हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।
✔️ पुलिस ने समय पर कार्रवाई कर शिकायतकर्ता को बचाया और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
➡️ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
4️⃣ निठारी कांड: सुप्रीम कोर्ट में 3 अप्रैल को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के निठारी कांड में आरोपी सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका स्वीकार कर ली है।
🔹 मामला संक्षेप में
✔️ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2023 को सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था।
✔️ CBI और यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।
✔️ अब 3 अप्रैल 2025 को इस मामले की सुनवाई होगी।
➡️ निठारी कांड भारतीय न्यायिक इतिहास का एक बड़ा और संवेदनशील मामला रहा है, जिसमें कई बच्चों के अपहरण, हत्या और दुष्कर्म की घटनाएँ सामने आई थीं।
📢 निष्कर्ष
🔹 सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत गाली पर महत्वपूर्ण व्याख्या दी है।
🔹 सट्टेबाजी एप पर रोक के लिए कड़े कानूनों की माँग बढ़ी।
🔹 अपहरण और धमकी के मामले में ट्रायल के बाद ही अंतिम फैसला होगा।
🔹 निठारी कांड पर 3 अप्रैल को फिर से सुनवाई होगी।
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