यूपी के निजी स्कूलों की वित्तीय जांच करेगी सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति 🏫📜
✍ नई दिल्ली, 19 मार्च 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों की वित्तीय स्थिति की जांच के लिए एक दो-सदस्यीय समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जीपी मित्तल करेंगे, जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) आदिश मेहरा इसके सदस्य होंगे।
🔹 यह समिति उन स्कूलों के खातों की जांच करेगी, जिन्होंने कोरोना महामारी (2020-21) के दौरान फीस में रियायत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
📌 क्यों बनाई गई समिति?
📢 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों को फीस का 15% अभिभावकों को लौटाने या समायोजित करने का आदेश दिया था।
✔️ इस फैसले के खिलाफ निजी स्कूलों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
✔️ स्कूलों का तर्क था कि महामारी के दौरान उनकी वित्तीय स्थिति भी प्रभावित हुई थी, इसलिए फीस में कटौती संभव नहीं थी।
✔️ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल की वित्तीय स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए व्यापक जांच जरूरी है।
🔹 इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए दो-सदस्यीय समिति का गठन किया।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
🗣️ मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा –
✔️ “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यापक दृष्टिकोण अपनाया, लेकिन हर स्कूल की वित्तीय स्थिति की अलग-अलग जांच जरूरी है।“
✔️ “सभी स्कूलों पर एक समान आदेश लागू करना उचित नहीं होगा।”
✔️ “न्यायमूर्ति जीपी मित्तल और सीए आदिश मेहरा की समिति स्कूलों के खातों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।“
📌 समिति यह भी देखेगी कि महामारी के दौरान स्कूलों के वित्तीय हालात कैसे थे और क्या फीस में कटौती संभव थी या नहीं।
🏫 निजी स्कूलों का क्या कहना है?
❌ निजी स्कूलों का दावा:
- लॉकडाउन के दौरान भी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ सैलरी और अन्य खर्च जारी रहे।
- ऑनलाइन शिक्षा के लिए तकनीकी अपग्रेडेशन पर भारी खर्च हुआ।
- फीस में कटौती से स्कूलों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती थी।
📢 अब समिति इन दावों की सत्यता की जांच करेगी और यह तय करेगी कि फीस में कटौती लागू होनी चाहिए या नहीं।
🔎 आगे क्या होगा?
📌 समिति यूपी के स्कूलों के खातों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।
📌 इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि हाईकोर्ट का आदेश सही था या नहीं।
📌 अगर समिति को स्कूलों की आर्थिक स्थिति कमजोर लगती है, तो फीस में कटौती का आदेश वापस भी लिया जा सकता है।
❓ क्या फीस वापसी सही फैसला था?
✔️ क्या महामारी के दौरान अभिभावकों को राहत मिलनी चाहिए थी?
✔️ क्या स्कूलों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वे फीस में कटौती नहीं कर सकते थे?
📢 आपका क्या विचार है? कमेंट में बताएं! 🗣️
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