नए इनकम टैक्स बिल में डिजिटल खातों की जांच: अफवाहों पर आयकर विभाग की सफाई

नए इनकम टैक्स बिल में डिजिटल खातों की जांच: अफवाहों पर आयकर विभाग की सफाई

नई दिल्ली। नए इनकम टैक्स बिल-2025 के तहत आयकर अधिकारी सिर्फ छापे या तलाशी अभियान के दौरान ही करदाता के डिजिटल या सोशल मीडिया खातों और कंप्यूटर उपकरणों की जांच कर सकेंगे। आयकर विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान 1961 के मौजूदा आयकर अधिनियम में पहले से ही शामिल था और नए बिल में इसे सिर्फ दोहराया गया है।

करदाताओं की ऑनलाइन गोपनीयता बरकरार

अधिकारी ने कहा कि इस शक्ति का उपयोग तभी किया जाएगा, जब करदाता डिजिटल स्टोरेज ड्राइव, ईमेल, क्लाउड, वॉट्सएप या टेलीग्राम जैसे संचार प्लेटफॉर्म के पासवर्ड साझा करने से इनकार करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों का उद्देश्य आम करदाताओं की जासूसी करना नहीं है, बल्कि टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में साक्ष्य जुटाना है।

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नए आयकर बिल के तहत प्रावधान

  • सोशल मीडिया और डिजिटल खातों की जांच
    ➝ केवल छापे या तलाशी अभियान के दौरान ही अधिकारी को डिजिटल डेटा तक पहुंचने की अनुमति होगी।
    पहले से चल रही जांच के मामलों में यह लागू नहीं होगा।
  • जांच प्रक्रिया और अधिकार प्राप्त अधिकारी
    ➝ नए आयकर बिल-2025 की धारा 247 के तहत संयुक्त निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, सहायक निदेशक, उपायुक्त या आयकर अधिकारी को डिजिटल डेटा तक पहुंचने का अधिकार होगा।
  • आम करदाता पर कोई प्रभाव नहीं
    ➝ आयकर विभाग का कहना है कि यह कानून आम करदाता को लक्षित नहीं करता, बल्कि केवल 1% मामलों में ही इसकी जरूरत पड़ती है।
    8.79 करोड़ सालाना दाखिल किए गए आईटीआर में से केवल 100-150 मामलों में ही तलाशी और छापेमारी की जाती है।

डिजिटल खातों की जांच पर आयकर विभाग की सफाई

आयकर विभाग ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि कर अधिकारियों को करदाताओं के ईमेल, सोशल मीडिया हैंडल और क्लाउड स्टोरेज की निगरानी के अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अफवाहें केवल डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं।

निष्कर्ष

नया इनकम टैक्स बिल-2025 करदाताओं की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि केवल विशेष परिस्थितियों में टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में साक्ष्य जुटाने के लिए डिजिटल डेटा तक पहुंचने की अनुमति देता है। इससे आम करदाताओं को कोई खतरा नहीं है और केवल संदिग्ध मामलों में ही यह शक्ति लागू होगी।


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