राजस्थान में फर्जी डिग्री घोटाला: जेएस यूनिवर्सिटी ने 100 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी की
जयपुर। राजस्थान में शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा के लिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार वैकेंसी निकल रही थीं, जिसका फायदा उठाकर जेएस यूनिवर्सिटी, शिकोहाबाद ने फर्जी डिग्री घोटाले को अंजाम दिया। जयपुर एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की जांच में खुलासा हुआ कि राजस्थान के 2067 छात्र-छात्राओं ने मोटी रकम देकर बैक डेट में बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) की फर्जी डिग्रियां प्राप्त की थीं।
इस घोटाले के जरिए यूनिवर्सिटी ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली।
कैसे सामने आया फर्जी डिग्री घोटाला?
✔ वर्ष 2015 में जेएस यूनिवर्सिटी को बीपीएड कोर्स के लिए मात्र 100 सीटों की मान्यता मिली थी।
✔ 2022 में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।
✔ जब सत्यापन किया गया, तो 2067 अभ्यर्थियों ने खुद को जेएस यूनिवर्सिटी का छात्र बताया।
✔ छात्रों की संख्या यूनिवर्सिटी की स्वीकृत सीटों से कई गुना अधिक थी, जिससे मामला संदिग्ध हो गया।
✔ फर्जी डिग्री धारकों ने हर डिग्री के लिए 3-5 लाख रुपये तक का भुगतान किया था।
100 सीटों की मान्यता, लेकिन 107 छात्र उत्तीर्ण!
जयपुर एसओजी की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि यूनिवर्सिटी को सिर्फ 100 सीटों की मान्यता थी, लेकिन 107 छात्र उत्तीर्ण हुए।
✔ यूनिवर्सिटी के शिक्षा सत्र और सीटों के अनुपात से अधिक संख्या में डिग्रियां जारी करना घोटाले की ओर इशारा करता है।
✔ एसओजी की टीम ने जब आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो 2067 संदिग्ध डिग्रीधारकों की पहचान हुई।
✔ कई अभ्यर्थियों ने फॉर्म में यूनिवर्सिटी का उल्लेख किया, जबकि उनके नाम अन्य यूनिवर्सिटी की सूची में थे।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई
✔ जयपुर एसओजी ने यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सुकेश यादव को जांच के दायरे में लिया।
✔ उनकी पत्नी गीता यादव, जो एके डिग्री कॉलेज में बीएड विभाग की प्रोफेसर हैं, विदेश यात्रा पर जाने की तैयारी कर रही थीं।
✔ यूनिवर्सिटी के अन्य अधिकारी फरार बताए जा रहे हैं।
✔ फर्जी डिग्री जारी करने के मामले में कई दलालों की भूमिका भी उजागर हुई है।
निष्कर्ष
राजस्थान में शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा में जेएस यूनिवर्सिटी का फर्जी डिग्री घोटाला बड़े पैमाने पर हुआ।
✔ यूनिवर्सिटी ने मान्यता से कई गुना अधिक डिग्रियां बेचकर 100 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की।
✔ घोटाले में शामिल छात्र-छात्राओं ने 3-5 लाख रुपये तक देकर फर्जी डिग्री प्राप्त की।
✔ एसओजी ने मामले की जांच तेज कर दी है और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
यह घोटाला न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख को धूमिल करता है, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि इस मामले में कितने आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसता है और कितने दोषियों को सजा मिलती है।
