यूजीसी द्वारा पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट समाप्त करने का विरोध, डूटा ने किया प्रदर्शन

यूजीसी द्वारा पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट समाप्त करने का विरोध, डूटा ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट समाप्त किए जाने के फैसले के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने यूजीसी कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में ऑक्टा (ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन) और अन्य शिक्षकों के संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल हुए।


शिक्षकों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन

डूटा के इस विरोध प्रदर्शन में ऑक्टा अध्यक्ष प्रो. उमेश प्रताप सिंह, आटा अध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी और ऑक्टा कोषाध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र यादव सहित कई शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

➡️ शिक्षकों की मुख्य मांगें:
पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट को बहाल किया जाए।
यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय शिक्षकों के अधिकारों का सम्मान करे।
शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए उचित वेतन वृद्धि दी जाए।

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“फैसला शिक्षकों के हितों के खिलाफ” – प्रो. उमेश प्रताप सिंह

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रो. उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी का यह फैसला उसके अपने ही रेगुलेशन के खिलाफ है और इससे देशभर के हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे। उन्होंने इस निर्णय को विरोधाभासी और हास्यास्पद करार दिया।

प्रो. एआर सिद्दीकी ने कहा कि –

“शोध करने में अधिक समय लगता है और इसी वजह से शिक्षकों की नौकरी पाने की औसत आयु अधिक होती है। ऐसे में पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट की सुविधा दी जानी चाहिए। इसे समाप्त करना शिक्षकों के हितों के खिलाफ है।”


UGC के फैसले पर सवाल

➡️ अब तक पीएचडी और एमफिल धारकों को इंक्रीमेंट दिया जाता था, जिससे उनकी सैलरी में वृद्धि होती थी।
➡️ इस निर्णय से नए और शोधरत शिक्षकों को वित्तीय नुकसान होगा, जिससे शोध कार्यों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
➡️ शिक्षकों का कहना है कि सरकार और यूजीसी को शोध और उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि बाधाएं खड़ी करनी चाहिए।


क्या होगा आगे?

डूटा और अन्य शिक्षक संगठनों ने यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को समर्थन पत्र सौंपकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला तो बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।


निष्कर्ष

यूजीसी द्वारा पीएचडी और एमफिल इंक्रीमेंट खत्म करने का फैसला शिक्षकों के लिए बड़ा झटका है। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा और शोध के स्तर को गिराएगा और योग्य शिक्षकों को हतोत्साहित करेगा। अब देखना होगा कि यूजीसी और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।


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