शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: जिले में 53 फर्जी शिक्षकों का पर्दाफाश, 18 गिरफ्तार
फर्जी शिक्षकों की संख्या बढ़ी, जांच में खुल रही परतें
शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले में 53 फर्जी शिक्षकों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 18 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 35 अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर भर्ती हुए इन शिक्षकों की जांच 2018 से जारी है। यह जांच 2010 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए शुरू की गई थी।
कैसे खुला फर्जीवाड़ा?
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों पर संदेह होने के बाद सरकार ने 2010 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन का आदेश दिया।
इसके लिए जिला स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई, जिसमें एडीएम की अध्यक्षता में एएसपी और बीएसए शामिल थे। इसके अलावा, बीईओ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, फर्जी शिक्षकों की पहचान होती गई। अब तक जिले में 53 फर्जी शिक्षकों की पुष्टि हो चुकी है।
गिरफ्तार किए गए शिक्षकों की सूची
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 18 शिक्षकों के नाम निम्नलिखित हैं:
- कन्हैया सिंह – प्राथमिक विद्यालय पकड़िया
- राजकुमार – सतेंद्र सिंह के नाम से (प्राथमिक विद्यालय नेवादा)
- रामबचन – राम अचल यादव के नाम से (प्राथमिक विद्यालय दोंदरा)
- राम सजन वर्मा – सुनील कुमार के नाम से (प्राथमिक विद्यालय परसोहना)
- देवमणि – सुरेंद्र प्रताप सिंह के नाम से (प्राथमिक विद्यालय नौव्वापुरवा)
- अनुराग यादव – प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुरवा
- अजय चौधरी उर्फ अजीत चौधरी – राम नवल के नाम से (प्राथमिक विद्यालय हरदत्त नगर गिरंट)
- इंद्रजीत त्रिपाठी – कृष्ण कुमार के नाम से (प्राथमिक विद्यालय सोरहिया)
- अजीत कुमार शुक्ल – प्राथमिक विद्यालय भिखारीपुर मसढ़ी
- सोभनाथ – प्राथमिक विद्यालय धनऊ पुर
- अजय प्रताप पांडेय – प्राथमिक विद्यालय सुविखा
- सियाराम चौधरी – रामकुमार के नाम से (प्राथमिक विद्यालय रमवापुर)
- हेमंत कुमार – देवेंद्र प्रताप के नाम से (प्राथमिक विद्यालय रमवापुर खास)
- आलोक कुमार गुप्ता उर्फ किशन गुप्ता – प्राथमिक विद्यालय बल्दीडीह
- प्रदीप कुमार – प्राथमिक विद्यालय केशवपुर
- जितेंद्र सिंह – प्राथमिक विद्यालय कोयलहवा
- उमेश कुमार मिश्र – प्राथमिक विद्यालय वैभी
- सुशील कुमार – प्राथमिक विद्यालय भवानी पुरवा
12 वर्षों से चल रही थी जांच, अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
इस जांच में 12 साल से अधिक समय लग गया, लेकिन फिर भी कई फर्जी शिक्षक पदोन्नति प्राप्त कर उच्च पदों पर पहुंच गए।
- उदाहरण के लिए, उमेश कुमार मिश्र, जो पहले प्राथमिक विद्यालय वैभी में सहायक शिक्षक थे, पदोन्नति पाकर उच्च प्राथमिक विद्यालय असनहरिया पहुंच गए। लेकिन इतने सालों तक उनकी फर्जी डिग्री का खुलासा नहीं हो सका।
फर्जी शिक्षकों को वेतन और अन्य लाभ भी मिले
- प्राथमिक विद्यालय बल्दीडीह के आलोक कुमार गुप्ता उर्फ किशन गुप्ता को विद्यालय में अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
- उन्होंने कक्षा निर्माण के लिए सरकारी धन भी निकाल लिया।
- अब बीएसए अजय कुमार ने उनके वेतन के साथ-साथ एसीआर के धन की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
- पुलिस बाकी 35 फर्जी शिक्षकों की तलाश कर रही है।
- सरकार ने सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की सख्ती से जांच करने का निर्देश दिया है।
- जिन शिक्षकों को अवैध तरीके से वेतन और अन्य सुविधाएं मिली हैं, उनकी रिकवरी की जाएगी।
- विभाग सभी भर्ती प्रक्रियाओं में सख्त नियम लागू करने की योजना बना रहा है।
निष्कर्ष
फर्जी शिक्षकों की यह संख्या शिक्षा व्यवस्था में हो रहे घोटालों की गंभीरता को दर्शाती है। यह सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता पर असर नहीं डालता, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी करता है।
शिक्षा विभाग को अब और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और योग्य शिक्षकों को ही सरकारी स्कूलों में नियुक्त किया जाए।
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