सुप्रीम कोर्ट: कार्यस्थल पर वरिष्ठ की डांट अपराध नहीं






सुप्रीम कोर्ट: कार्यस्थल पर वरिष्ठ की डांट अपराध नहीं ⚖️

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर वरिष्ठ की डांट को जानबूझकर अपमानित करना नहीं माना जा सकता है, जिसके लिए आपराधिक कार्यवाही की जरूरत पड़े। शीर्ष कोर्ट ने कहा, ऐसे मामलों में आपराधिक आरोप लगाने से कार्यस्थल का अनुशासन खराब हो सकता है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? 📝

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 504 के तहत केवल दुर्व्यवहार, असभ्यता, अशिष्टता या बदतमीजी को जानबूझकर अपमान नहीं माना जा सकता है।

आईपीसी की धारा 504 का संबंध शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से है।

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मामला क्या था? 🔎

यह मामला राष्ट्रीय बौद्धिक सशक्तीकरण संस्थान के कार्यवाहक निदेशक के खिलाफ 2022 के आपराधिक मामले से जुड़ा है, जिसमें उन पर सहायक प्रोफेसर को अपमानित करने का आरोप था।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि उच्च अधिकारियों को शिकायत देने पर निदेशक ने उन्हें अन्य कर्मचारियों के सामने डांटा और फटकार लगाई

शिकायत में यह भी आरोप था कि निदेशक संस्थान में पर्याप्त पीपीई किट देने और उसके रखरखाव में विफल रहे, जिससे कोविड-19 जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा था।

कोर्ट का तर्क और फैसला 📜

कोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र और उसमें मौजूद दस्तावेजों को देखने से आरोप अनुमान पर आधारित लगते हैं।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वरिष्ठ की चेतावनी कार्यस्थल के अनुशासन और कर्तव्य निर्वहन से जुड़ी हो, तो इसे आईपीसी की धारा 504 के तहत भड़काने के इरादे से जानबूझकर अपमान नहीं माना जा सकता है।

कर्तव्य निर्वहन की चेतावनी अपमान नहीं ❌

पीठ ने कहा, कर्तव्य निर्वहन की चेतावनी को जानबूझकर अपमान नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह पेशेवर अनुशासन और ईमानदारी से कार्यपालन के लिए आवश्यक है।

कोर्ट ने सशक्तीकरण संस्थान के कार्यवाहक निदेशक के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द करते हुए कहा कि अनुशासन बनाए रखना वरिष्ठों की जिम्मेदारी है और डांट-फटकार को आपराधिक आरोप का आधार नहीं बनाया जा सकता।

निष्कर्ष 🔍

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कार्यस्थल के अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह स्पष्ट करता है कि वरिष्ठों की डांट को आपराधिक अपमान मानकर अपराध का मामला नहीं बनाया जा सकता।

क्या आपको लगता है कि वरिष्ठों की डांट को अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाना चाहिए? आपकी राय हमें टिप्पणियों में बताएं!

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