टीजीटी-पीजीटी 2016: इलाहाबाद हाईकोर्ट का प्रतीक्षा सूची जारी करने का आदेश ⚖️
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी-पीजीटी 2016 के 25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची तीन हफ्ते में जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को इसे आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आयोग की ओर से अब तक जारी सूची से मनमानी झलक रही है।
अदालती आदेश का विवरण 📝
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने नीतीश मौर्या समेत कई अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए दिया है। मामला उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग) द्वारा 2016 में प्रकाशित विज्ञापन से जुड़ी शिक्षक भर्ती का है।
अभ्यर्थियों के आरोप और कोर्ट की टिप्पणी ❗
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुल रिक्तियों के सापेक्ष 25 प्रतिशत प्रतीक्षा सूची जारी की जानी थी, लेकिन आयोग ने केवल 10-12 प्रतिशत चयनितों की सूची जारी कर पल्ला झाड़ लिया। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने माना कि पूर्व में जारी सूची में मनमानी झलक रही है और आयोग को तीन हफ्ते के भीतर प्रतीक्षा सूची जारी करने का आदेश दिया।
कोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय 📜
पीड़ित का रिश्तेदार होने पर गवाही खारिज नहीं ❌
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई गवाह पीड़िता का रिश्तेदार है, तो केवल इस आधार पर उसकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने हत्या व डकैती के मामले में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए दी।
यह मामला एटा के गांव नगला हिम्मत में 25 जुलाई 1982 को जौहरी की हत्या से संबंधित है।
निष्कर्ष 🔍
टीजीटी-पीजीटी 2016 की प्रतीक्षा सूची को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की किरण है। यह निर्णय भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायपूर्ण चयन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्या चयन आयोग को और अधिक पारदर्शिता अपनानी चाहिए? आपकी राय हमें टिप्पणियों में बताएं!
