नर्सिंग कॉलेजों के शिक्षकों की सेवा नियमावली बनेगी 🚀
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग शिक्षकों की सेवा नियमावली बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे नियमित भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। अभी तक इन कॉलेजों में संविदा के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
प्रदेश में 46 मेडिकल कॉलेजों में चल रहे हैं नर्सिंग कोर्स 🏥
उत्तर प्रदेश के केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान और सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान सहित 23 मेडिकल कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग कोर्स चल रहा है। 2022-23 से 60-60 सीटों के साथ 10 राजकीय और पांच स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं। अगले साल तक नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 46 हो जाएगी।
नियमित भर्ती और पदोन्नति का रास्ता साफ ✅
सेवा नियमावली बनने से नियमित भर्ती के साथ ही पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तें भी स्पष्ट हो जाएंगी। संविदा शिक्षकों को नियमित करने का प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी।
राजकीय और स्वशासी कॉलेजों की अलग व्यवस्था 🔄
राजकीय और स्वशासी कॉलेजों के लिए अलग-अलग सेवा नियमावली बनाई जाएगी। ट्यूटर, असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रधानाचार्य और उप प्रधानाचार्य के पदों पर सीधी भर्ती की योजना है, जबकि एसोसिएट और एडिशनल प्रोफेसर के पदों को पदोन्नति के जरिए भरा जाएगा।
शिक्षकों के पदों का मानक 📊
40 से 60 छात्रों के दाखिले पर प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य और प्रोफेसर के एक-एक पद का मानक तय किया गया है। एसोसिएट प्रोफेसर के दो पद, असिस्टेंट प्रोफेसर के तीन पद और ट्यूटर के 8 से 16 पद का मानक है।
मानदेय और वेतन 📈
संविदा नियुक्ति में प्रधानाचार्य को 1.40 लाख, उप प्रधानाचार्य को 1.20 लाख, प्रोफेसर को 1 लाख, एसोसिएट प्रोफेसर को 80 हजार, असिस्टेंट प्रोफेसर को 70 हजार और ट्यूटर को 45 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है।
अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन 📚
राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा और केरल सहित विभिन्न राज्यों में नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती संबंधी सेवा नियमावली का अध्ययन करने के बाद उत्तर प्रदेश के लिए अंतिम नियमावली तैयार की जाएगी।
नियमावली का क्रियान्वयन 📝
कमेटी द्वारा अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद नियमावली को लागू करके नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
निष्कर्ष ✍️
उत्तर प्रदेश में नर्सिंग शिक्षकों की सेवा नियमावली बनने से नियमित भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी। संविदा शिक्षकों को स्थायित्व मिलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह शिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाएगा और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलेगी।
