राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई और सुविधाओं में सुधार के लिए निरीक्षण में लापरवाही पर 100 से अधिक अधिकारियों को नोटिस
राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई और अन्य सुविधाओं में सुधार के उद्देश्य से नियमित निरीक्षण न करने पर 44 डीआईओएस सहित 100 से ज्यादा अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इनमें लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, बाराबंकी, और सुल्तानपुर जैसे जिले भी शामिल हैं।
निरीक्षण आख्या अपलोड करने के निर्देश
सभी संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों का निरीक्षण करने के बाद परख एप पर निरीक्षण आख्या अपलोड करनी होती है। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक, डीआईओएस द्वितीय, और जिला समन्वयकों को प्रतिमाह निश्चित संख्या में विद्यालयों का निरीक्षण करना अनिवार्य है:
- मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक: 10 विद्यालय
- मंडलीय उप शिक्षा निदेशक: 10 विद्यालय
- डीआईओएस द्वितीय: 10 विद्यालय
- जिला समन्वयक: 10 विद्यालय
- डीआईओएस: 20 विद्यालय
निरीक्षण न करने पर कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने जनवरी माह में निरीक्षण न करने पर संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, उप शिक्षा निदेशक, 6 जिलों के डीआईओएस द्वितीय, और 51 जिलों के जिला समन्वयक शामिल हैं।
अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग
निदेशक ने अधिकारियों से पूछा है कि उन्होंने निरीक्षण क्यों नहीं किया और इसका औचित्य क्या है। साथ ही, भविष्य में निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विद्यालयों में पढ़ाई और सुविधाओं में सुधार का उद्देश्य
राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह निरीक्षण प्रक्रिया आवश्यक है। नियमित निरीक्षण से पठन-पाठन की गुणवत्ता में सुधार और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
निष्कर्ष
यह कार्रवाई शिक्षा विभाग की गुणवत्ता में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। अगर संबंधित अधिकारी समय पर निरीक्षण नहीं करते हैं, तो उन पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
