सुप्रीम सवाल: आप यह कैसे कह सकते हैं कि योग केंद्र शैक्षणिक संस्थान नहीं हो सकते?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी नोटिस को लेकर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि योग और ध्यान केंद्रों को शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणी में क्यों नहीं रखा जा सकता?
मामले की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में स्थित ईशा फाउंडेशन को लेकर पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने निर्माण से संबंधित नोटिस जारी किया था। संस्था ने इस नोटिस को रद्द करने के लिए दो साल बाद अपील की, जिससे कोर्ट ने नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि टीचर्स ट्रेनिंग या शिक्षा से संबंधित कोई भी संस्था शैक्षणिक संस्थान की श्रेणी में आती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाए कि योग केंद्रों को इससे बाहर क्यों रखा गया?
राज्य सरकार की देरी पर कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी देरी से ही विवाद उत्पन्न होता है। अगर सरकार पहले से स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर देती, तो इस तरह के मामलों में अनावश्यक जटिलता नहीं आती।
यूट्यूबर रणवीर की याचिका पर तत्काल सुनवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया की ‘चैटजीपीटी बैन’ मामले में याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह मामला प्राथमिकता में नहीं आता।
पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर 17 मार्च तक रोक लगा दी है। उन्हें गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेने का आरोप है।
इस पूरे मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी गई है और अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पर सरकार को स्पष्ट निर्देश देने होंगे।
