प्रयागराज कुंभ में भारी अव्यवस्था, एंट्री प्वाइंट बंद, श्रद्धालु परेशान





प्रयागराज कुंभ में भारी अव्यवस्था, एंट्री प्वाइंट बंद, श्रद्धालु परेशान

प्रयागराज कुंभ में भारी अव्यवस्था, एंट्री प्वाइंट बंद, श्रद्धालु परेशान

प्रयागराज: कुंभ मेले में आस्था की डुबकी लगाने आए लाखों श्रद्धालु इस समय भारी अव्यवस्था का शिकार हो गए हैं। प्रशासन ने प्रयागराज शहर और कुंभ मेला क्षेत्र के सभी एंट्री प्वाइंट बंद कर दिए हैं, जिससे श्रद्धालु जहां के तहां ठहर गए हैं।

20 किमी पैदल यात्रा के बाद भी प्रवेश नहीं

श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में है, लेकिन कुंभ क्षेत्र में प्रवेश करना नामुमकिन हो गया है। 20-20 किमी तक पैदल चलने के बावजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

कोई सूचना नहीं, प्रशासन गायब

स्थिति इतनी भयावह है कि श्रद्धालुओं को कोई सूचना तक नहीं दी जा रही। लोग असमंजस में हैं कि कौन सा रास्ता खुलेगा और कब तक बंद रहेगा। प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगने पर भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही।

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पुलिस की तानाशाही और वीआईपी एंट्री

मेले की पूरी व्यवस्था दो IPS अधिकारियों ने अपनी निजी जागीर बना ली है। आम श्रद्धालुओं को रोक दिया जा रहा है, जबकि पुलिस अधिकारियों के रिश्तेदार और वीआईपी लोगों को डायरेक्ट एंट्री दी जा रही है। एंट्री प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मी सिर्फ प्रोटोकॉल वालों को ही अंदर जाने दे रहे हैं, जबकि आम जनता के लिए सभी रास्ते बंद हैं।

माइक पर ऐलान – जहां हो, वहीं स्नान करो और लौट जाओ!

प्रशासन की ओर से माइक से घोषणा की जा रही है कि जहां जो घाट दिखे, वहीं स्नान करें और वापस लौट जाएं। लेकिन घाटों पर भारी भीड़ के कारण वहां पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

भोजन-पानी तक की सुविधा नहीं, बुजुर्ग और महिलाएं बेहाल

सबसे बुरी स्थिति बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की हो रही है। पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है, जिससे लोग थककर बेहाल हो गए हैं। अव्यवस्था के कारण कई श्रद्धालुओं की हालत बिगड़ रही है।

नागवासुकी मंदिर के पास सबसे ज्यादा बदइंतजामी

सबसे खराब स्थिति नागवासुकी मंदिर के पास है, जहां अव्यवस्था चरम पर है। यहां तक कि स्थानीय लोगों का कहना है कि आम आदमी के लिए कुंभ क्षेत्र में प्रवेश करना अब एक दिवास्वप्न जैसा हो गया है।

प्रशासन की मॉनिटरिंग फेल, कुंभ व्यवस्था ध्वस्त

पूरे मेले की कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। शासन की लापरवाही के कारण पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।

सवाल यह उठता है: क्या प्रशासन इस भीषण अव्यवस्था का समाधान निकाल पाएगा, या श्रद्धालुओं को यूं ही परेशान होना पड़ेगा?

अभी के लिए, कुंभ मेला 2025 अव्यवस्था और प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण बन चुका है।

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