# **अपार आईडी**
*अवधी में एक छोटा सा प्रयास*
ई अपार के चक्कर मा,
मास्टर साहेब पगलाइ गएन।
घर मलकिन कै चिंता बढ़िगै,
के कै बीरा डांकि गएन।
बगल गाँव के पंडित के घर,
वै भिन्सारेन पहुँचि गईं।
गोड़ पकड़ि के पंडित कै फिर,
रोइ रोइ वै कहत गईं।।
रात-रात यै चौंकत बाटेन,
एहरी-ओहरी भागत बाटेन।
मोबाइल के शीशा पै यै,
धै-धै अंगुरी दाबत बाटेन।।
खाय-पियै कै सुधि नाहीं बा,
बोले पै गुर्रात अहैं।
हालत देखि के लागत बाटै,
यै हाँथे से जात अहैं।।
बाबा जी, अब कैसेव कै के,
ई हमाय तकलीफ हरा?
जौन कहा दच्छिना चढ़ाई,
इनका कैसेव ठीक करा।।
तौ बाबा जी ध्यान लगाएन,
सुमिरेन बाला जी सरकार।
तुरतय उनके मुँह से निकला,
“भूत न आटै आय अपार।।”
हफ्ता भर मा ई बीमारी,
अपुनै होइ जाए सब दूर।
उनका उनके हाल पै छोड़ा,
सोंच न राखा एक्कउ चूर।।
**✒️हेमन्त शुक्ल**
