चैटजीपीटी और डीपसीक के उपयोग पर रोक वित्त मंत्रालय की एडवाइजरी जारी









सरकारी कंप्यूटरों पर चैटजीपीटी और डीपसीक के उपयोग पर रोक

सरकारी कंप्यूटरों पर चैटजीपीटी और डीपसीक के उपयोग पर रोक

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को चैटजीपीटी, डीपसीक और अन्य कृत्रिम मेधा (AI) टूल्स के उपयोग पर सख्त पाबंदी लगाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय का मानना है कि इन टूल्स के इस्तेमाल से गोपनीय सरकारी डेटा को खतरा हो सकता है।

🔴 वित्त मंत्रालय की एडवाइजरी

मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:

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  • सरकारी कार्यालयों के कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों पर AI टूल्स के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
  • इन एप्स का इस्तेमाल संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया और इटली ने भी इसी कारण से चीन की AI कंपनी डीपसीक पर पाबंदी लगाई है।

🧠 डीपसीक का AI टूल R1 और उसका प्रभाव

हाल ही में, डीपसीक ने अपने नए और किफायती AI टूल R1 के लॉन्च के बाद पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इसका असर इतना व्यापक था कि ओपनएआई और एनवीडिया जैसी दिग्गज कंपनियों को भी बड़ा झटका लगा।

🤝 ओपनएआई भारत के साथ करेगा सहयोग

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भारत के AI मार्केट को बेहद महत्वपूर्ण बताया है।

उन्होंने कहा कि:

  • भारत AI और ओपनएआई के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है।
  • पिछले साल की तुलना में भारत में AI उपयोगकर्ताओं की संख्या तीन गुना हो गई है।

💡 भारत में AI का भविष्य

ऑल्टमैन ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जिसमें भारत में AI के विकास पर चर्चा हुई। वैष्णव ने कहा, “अगर इनोवेशन दुनिया में कहीं भी हो सकता है, तो फिर भारत में क्यों नहीं?”

उन्होंने यह भी बताया कि भारत AI को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • स्वास्थ्य सेवा
  • शिक्षा
  • कृषि
  • आपदा प्रबंधन
  • परिवहन

🔚 निष्कर्ष

जहां एक ओर AI तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को प्राथमिकता दे रही है। वित्त मंत्रालय के इस फैसले से सरकारी डेटा को अधिक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।


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