भारत में पहली बार इंसान में मशीनी दिल धड़का | सेना चिकित्सा सेवाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि









भारत में पहली बार इंसान में मशीनी दिल धड़का | सेना चिकित्सा सेवाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत में पहली बार इंसान में मशीनी दिल धड़का

नई दिल्ली। भारत में पहली बार चिकित्सा विज्ञान में एक नया इतिहास रचते हुए, हार्ट फेल महिला मरीज में लेफ्ट वेंट्रिकुलर सहायक उपकरण (LVAD) सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। इस तकनीक का उपयोग हृदय प्रत्यारोपण के विकल्प के रूप में किया गया है। इसे मैकेनिकल हार्ट (कृत्रिम हृदय) भी कहा जाता है।

सेना के रिसर्च एवं रेफरल अस्पताल का अनोखा कारनामा

दिल्ली कैंट स्थित सेना के रिसर्च एवं रेफरल अस्पताल के डॉक्टरों ने इस उपलब्धि को हासिल किया है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी दी। इस तकनीक के जरिए महिला मरीज का जीवन बचाया गया, जो दो वर्षों से हृदय प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रही थी।

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हार्टमेट-3: हृदय प्रत्यारोपण का विकल्प

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मरीज में हार्टमेट-3 नामक उपकरण लगाया गया है, जो हृदय की खून पंपिंग को पुनः सुचारू करता है। यह तकनीक लंबे समय तक प्रभावी रूप से कार्य करती है और हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता को समाप्त कर सकती है।

कैसे काम करता है मैकेनिकल हार्ट?

हार्ट फेल मरीजों में लेफ्ट वेंट्रिकुलर द्वारा रक्त पंपिंग की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है। सामान्यतः ऐसे मामलों में हृदय प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प होता है। लेकिन अब, हार्टमेट-3 उपकरण इस पंपिंग प्रक्रिया को सुधारने में सहायता करता है और मरीज को एक नया जीवन प्रदान करता है।

दुनिया भर में 18,000 मरीजों में सफलता

अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में 18,000 से अधिक मरीजों में इस उपकरण का सफल उपयोग किया जा चुका है। भारत में यह पहली बार लगाया गया है, जो भारतीय चिकित्सा जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

सैनिक की पत्नी को मिला जीवनदान

सेना चिकित्सा सेवाओं की यह ऐतिहासिक उपलब्धि उस समय सामने आई जब 49 वर्षीय सैन्यकर्मी की पत्नी, जिनका हृदय पूरी तरह से खराब हो चुका था, को हार्टमेट-3 उपकरण लगाया गया। यह महिला पिछले दो वर्षों से हृदय प्रत्यारोपण का इंतजार कर रही थी।

क्या है भविष्य की संभावनाएं?

  • भारत में हृदय रोगियों के लिए सस्ता और प्रभावी उपचार उपलब्ध होगा।
  • हृदय प्रत्यारोपण की बढ़ती मांग को देखते हुए यह एक उल्लेखनीय समाधान है।
  • आने वाले समय में अन्य अस्पतालों में भी इस तकनीक का विस्तार किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय का बयान

रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को सेना चिकित्सा सेवाओं की एक ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि यह भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे भविष्य में कई जीवन बचाए जा सकेंगे।

निष्कर्ष

भारत में पहली बार मैकेनिकल हार्ट का सफल प्रत्यारोपण, चिकित्सा विज्ञान में एक नई क्रांति है। यह तकनीक हृदय रोगियों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।


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