कोटा ने फिर दिया दर्द: एक ही दिन में दो छात्रों की आत्महत्या







कोटा ने फिर दिया दर्द: एक ही दिन में दो छात्रों की आत्महत्या

कोटा ने फिर दिया दर्द: एक ही दिन में दो छात्रों की आत्महत्या

कोटा। शिक्षा का हब माने जाने वाले राजस्थान के कोटा में छात्रों की आत्महत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बुधवार को एक ही दिन में नीट की तैयारी कर रही छात्रा और जेईई की तैयारी कर रहे छात्र ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। जनवरी 2025 में आत्महत्या के कुल 6 मामले सामने आए हैं, जो प्रशासन और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।

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एक दिन में दो दर्दनाक घटनाएं

बुधवार सुबह 10 बजे गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली छात्रा अफ्शा शेख ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसी दिन शाम को असम निवासी पराग ने भी आत्मघाती कदम उठाया। पराग की मां उससे मिलने कोटा आई हुई थीं और उसकी परीक्षा 27 जनवरी को थी। दोनों घटनाओं ने कोटा के माहौल को एक बार फिर झकझोर कर रख दिया।

गाइडलाइन्स की अनदेखी: पंखों में नहीं थे हैंगिंग डिवाइस

हाल ही में कोटा पुलिस ने आत्महत्या रोकने के लिए गाइडलाइन्स जारी की थीं, जिसमें पंखों में हैंगिंग डिवाइस लगाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इन दोनों घटनाओं में पंखों पर डिवाइस नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस आत्महत्या की घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकता है, लेकिन गाइडलाइन्स का पालन न होना इन मामलों में लापरवाही को उजागर करता है।

परीक्षा का तनाव बना जानलेवा

जेईई और नीट जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव छात्रों पर भारी पड़ रहा है। बुधवार को आत्महत्या करने वाले पराग की परीक्षा 27 जनवरी को थी। इसी महीने 17 जनवरी को जेईई की तैयारी कर रहे मनन जैन ने भी अपनी जान दे दी थी। परीक्षा नजदीक आने पर बढ़ता तनाव छात्रों को इस कगार पर पहुंचा रहा है।

जनवरी 2025 में आत्महत्या के मामले

  • 7 जनवरी: हरियाणा के महेंद्रगढ़ के छात्र नीरज जाट ने आत्महत्या की।
  • 8 जनवरी: मध्यप्रदेश के गुना निवासी अभिषेक ने फांसी लगाई।
  • 16 जनवरी: ओडिशा निवासी अभिजीत गिरी ने हॉस्टल में आत्महत्या की।
  • 17 जनवरी: बूंदी के मनन जैन ने आत्मघाती कदम उठाया।
  • 22 जनवरी: अहमदाबाद की अफ्शा शेख ने फांसी लगाई।
  • 22 जनवरी: असम के पराग ने भी अपनी जान दे दी।

आत्महत्या रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

कोटा में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। मनोवैज्ञानिक परामर्श, छात्रों पर दबाव कम करना, और गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन इन घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकते हैं।

निष्कर्ष

कोटा, जो देश में शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता है, अब आत्महत्या के मामलों के कारण सवालों के घेरे में है। बढ़ते तनाव और दबाव के कारण छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, ताकि कोटा का नाम शिक्षा के साथ सकारात्मक बदलाव के लिए जाना जा सके।


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