
मुर्गा आसनात्मक क्रिया – विधि, लाभ और सावधानियाँ
पहले स्कूलों में जब कोई विद्यार्थी शरारत करता था तो शिक्षकगण उसे मुर्गा बना देते थे। वैसे तो यह एक सज़ा मानी जाती थी, लेकिन यह क्रिया शरीर को कई प्रकार से लाभ पहुँचाती है। यह आसन एक प्रकार का योग अभ्यास है जो विभिन्न शारीरिक और मानसिक लाभ प्रदान करता है।
मुर्गा आसन करने की विधि
मुर्गा आसन करने की विधि निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है:
- दोनों पैरों को थोड़ा सा फैलाकर खड़े हो जाएँ।
- नीचे की तरफ झुकते हुए घुटनों को हल्का मोड़ें।
- दोनों हाथों को घुटनों के अंदर से डालकर कानों को पकड़ें।
- इस अवस्था में आने के बाद धीरे-धीरे नितंबों को ऊपर उठाएँ।
- सिर को सामने की तरफ रखने की कोशिश करें।
- 5 से 10 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें और फिर वापस मूल अवस्था में आ जाएँ।
श्वसन प्रक्रिया और अभ्यास समय
इस आसन को करते समय सांस की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दें:
- सामने झुकते समय श्वास छोड़ें।
- मूल अवस्था में लौटते समय श्वास लें।
- इस क्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।
मुर्गा आसन के लाभ
इस आसन को नियमित रूप से करने के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं:
- वायु निष्कासन के लिए अत्यंत लाभदायक आसन है।
- चेहरे में रक्त संचार बढ़ने से ओज-तेज में वृद्धि होती है और झुर्रियाँ समाप्त होती हैं।
- स्मरण शक्ति बढ़ती है, इसलिए विद्यार्थियों को इसे अवश्य करना चाहिए।
- आँखों के लिए लाभदायक होता है और माइग्रेन में राहत मिलती है।
- नितंब, जंघा, पीठ एवं मेरुदण्ड की माँसपेशियों में खिंचाव होने से रक्त संचार में सुधार होता है।
मुर्गा आसन करते समय सावधानियाँ
इस आसन का अभ्यास करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान रखें:
- हृदय रोगियों को इस आसन से बचना चाहिए।
- उच्च रक्तचाप के रोगी इस आसन को न करें।
- पुराने कमर दर्द के रोगियों के लिए इसे करने की अनुशंसा नहीं की जाती।
- गर्भवती महिलाएँ इस आसन को न करें।
निष्कर्ष
मुर्गा आसन न केवल एक सज़ा के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह एक उत्कृष्ट योग अभ्यास भी है। यह संपूर्ण शरीर को संतुलन और लचीलापन प्रदान करता है। इस आसन को करते समय उपयुक्त सावधानियाँ अपनाना आवश्यक है, ताकि इससे अधिकतम लाभ प्राप्त किए जा सकें।स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए मुर्गा आसन को अपने नियमित अभ्यास में शामिल करें और स्वास्थ्य लाभ उठाएँ।
