आरटीई: दूसरे चरण में 95 हजार आवेदन, कई जिलों में 500 भी नहीं






आरटीई: दूसरे चरण में 95 हजार आवेदन, कई जिलों में 500 भी नहीं

आरटीई: दूसरे चरण में 95 हजार आवेदन, कई जिलों में 500 भी नहीं

लखनऊ। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए आरटीई (निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत दूसरे चरण की आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस चरण में केवल 95,591 आवेदन हुए, जो पहले चरण के मुकाबले करीब 38 हजार कम हैं।

**दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी, आंकड़े जारी**

आरटीई के तहत इस बार कुल चार चरणों में आवेदन प्रक्रिया संपन्न होनी है। दूसरे चरण के आवेदन 19 जनवरी तक किए गए थे और इनके आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। हालांकि, यह आंकड़ा उम्मीद से कम है।

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**कई जिलों में 500 आवेदन भी नहीं**

प्रदेश के कई जिलों में आवेदन की संख्या बेहद कम रही। एक दर्जन जिलों में तो यह आंकड़ा 500 तक भी नहीं पहुंचा। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि सरकार की योजना के तहत अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को लाभान्वित करना प्राथमिकता है।

**पहले चरण के मुकाबले गिरावट**

आरटीई के दूसरे चरण में आवेदन की संख्या में पहले चरण के मुकाबले भारी गिरावट देखी गई। पहले चरण में अपेक्षाकृत अधिक बच्चों ने आवेदन किया था, जबकि दूसरे चरण में 38 हजार कम आवेदन हुए। यह गिरावट योजना की पहुंच और जागरूकता पर सवाल खड़े करती है।

**चार चरणों में होनी है प्रक्रिया**

इस बार आरटीई के तहत चार चरणों में आवेदन प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकतम जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर मिल सके। हालांकि, शुरुआती चरणों में कम आवेदन सरकार और विभागों के लिए चिंता का विषय है।

**कम आवेदन के कारण और चुनौतियां**

कम आवेदन का एक प्रमुख कारण जागरूकता की कमी है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आरटीई के लाभों की जानकारी अभी भी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी समस्याएं और अभिभावकों की अनभिज्ञता भी बड़ी बाधा हैं।

**सरकार और विभाग की जिम्मेदारी**

सरकार और संबंधित विभागों के लिए यह आवश्यक है कि वे योजना के प्रचार-प्रसार पर अधिक जोर दें। जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक अभिभावकों को योजना के लाभों के बारे में बताया जाना चाहिए। इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।

लेखक: सरकारी कलम

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