शहरी क्षेत्रों के 19% स्कूल शिक्षक विहीन
लेखक: अजीत कुमार
दोषपूर्ण नीतियों से बढ़ी शिक्षकों की कमी
स्थानांतरण और समायोजन की दोषपूर्ण नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के 19% से अधिक प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हो गए हैं। इसके साथ ही करीब 12% स्कूल केवल शिक्षा मित्रों के भरोसे चल रहे हैं, जो भी शिक्षक विहीन स्कूलों की श्रेणी में आने लगे हैं।
शहरी स्कूलों की स्थिति
प्रदेश में कुल 5,104 शहरी परिषदीय स्कूल हैं, जिनमें 3,906 प्राथमिक स्कूल और 1,198 अपर प्राइमरी स्कूल शामिल हैं। इनमें से 970 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गए हैं, जबकि लगभग 428 स्कूल शिक्षा मित्रों के सहारे किसी तरह संचालित किए जा रहे हैं।
आरटीई मानकों के अनुसार शिक्षकों की कमी
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 119,369 शिक्षकों की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में केवल 5,920 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे 13,349 शिक्षकों की भारी कमी है। इसका असर:
- प्राइमरी स्कूलों में 77% शिक्षकों की कमी।
- अपर प्राइमरी स्कूलों में 40% शिक्षकों की कमी।
2011 के बाद से कोई स्थानांतरण नहीं
सरकार ने 2011 के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों का कोई स्थानांतरण नहीं किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सेवानिवृत्ति और नई भर्तियां न होने से शहरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम होती चली गई। लखनऊ में ही 297 प्राथमिक स्कूलों में से 60 स्कूल शिक्षक विहीन हो चुके हैं।
जिलावार शिक्षक विहीन स्कूल
| जिला | शिक्षक विहीन स्कूल |
|---|---|
| लखनऊ | 60 |
| गोरखपुर | 60 |
| प्रयागराज | 74 |
| वाराणसी | 56 |
| मेरठ | 71 |
| अयोध्या | 72 |
| गौतमबुद्धनगर | 66 |
| देवरिया | 69 |
समस्या और समाधान
शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी ने शिक्षा व्यवस्था को संकट में डाल दिया है। छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। स्थानांतरण नीति में सुधार और नई भर्तियां इस समस्या को हल करने के लिए आवश्यक हैं, ताकि सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
