ज्यादा दूध पीने से बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है बुरा असर
लखनऊ: बच्चों को सेहतमंद रखने के लिए दूध को जरूरी समझा जाता है, लेकिन अत्यधिक दूध पीना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दिनभर में बच्चों के लिए 300 मिलीलीटर दूध पर्याप्त है, जबकि वे एक लीटर से अधिक दूध का सेवन कर रहे हैं। इस आदत के कारण बच्चों में कब्ज, खून की कमी और मोटापा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
कब्ज की समस्या से परेशान बच्चे
पीजीआई की ओपीडी में हर महीने दूसरे अस्पतालों से कब्ज के शिकार 120 बच्चे रेफर किए जा रहे हैं। पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. मोइनक सेन शर्मा ने बताया कि 5 वर्ष तक की उम्र के 80% बच्चे और इससे अधिक उम्र के 20% बच्चे कब्ज की समस्या से पीड़ित हैं। अधिक दूध के सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी को इसका प्रमुख कारण माना गया है।
कब्ज के कारण और लक्षण
मुख्य कारण:
- अत्यधिक दूध का सेवन
- सूखी खांसी व सर्दी में दी जाने वाली दवाएं
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- मोबाइल और टीवी देखने के दौरान शौच को रोकना
- बाजार का तला-भुना खानपान
लक्षण:
- पेट में ऐंठन और सूजन
- मल का सख्त होना
- शौच में दर्द और असहजता
- शौच जाने से बचने की प्रवृत्ति
डॉक्टरों की सलाह
डॉ. मोइनक सेन शर्मा का कहना है कि बच्चों को 300 मिलीलीटर दूध से अधिक न दें। इसके अलावा, उन्हें फल, सब्जियां, दाल, चोकर वाली रोटी, छोला और राजमा जैसे खाद्य पदार्थ खिलाएं। साथ ही, बच्चों को रोज एक घंटे आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रेरित करें।
बच्चों को शौच का प्रशिक्षण दें
डॉ. मोइनक का कहना है कि डेढ़ से तीन साल की उम्र में बच्चों को शौच और पेशाब के लिए प्रशिक्षण देना जरूरी है। भोजन के बाद उन्हें शौचालय जाने की आदत डालें। यह न केवल कब्ज को दूर रखने में मदद करेगा, बल्कि स्वस्थ आदतें भी विकसित करेगा।
इन चीजों को शामिल करें आहार में
- छिलके वाले फल
- हरी सब्जियां
- सोयाबीन
- चोकर वाली रोटी
निष्कर्ष
बच्चों को संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली की आवश्यकता है। दूध की मात्रा सीमित रखें और उन्हें नियमित रूप से खेल-कूद के लिए प्रेरित करें। इस तरह, आप उनकी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं से बचा सकते हैं।
