मुफ्त के उपहार के लिए पैसे, जजों के पेंशन-वेतन के लिए नहीं : कोर्ट









सुप्रीम कोर्ट: जजों के वेतन-पेंशन और सरोगेसी कानून पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने जजों के वेतन-पेंशन और सरोगेसी कानून पर केंद्र और राज्यों को लगाई फटकार

जजों के वेतन-पेंशन पर राज्य सरकारों की उदासीनता पर जताई निराशा, सरोगेसी कानून की समीक्षा की तारीख तय।

जजों के वेतन-पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जजों के वेतन और पेंशन के मुद्दों पर राज्य सरकारों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि राज्यों के पास मुफ्त उपहार बांटने के पैसे हैं, लेकिन जजों के वेतन और पेंशन के लिए वित्तीय संकट का बहाना बनाया जाता है।

याचिका 2015 में जज एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें वेतन-पेंशन और अन्य सुविधाओं के लिए समान नीति की मांग की गई है। कोर्ट ने कहा कि कई जजों को समय पर वेतन या पेंशन नहीं मिलती है, और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले अन्य लाभ भी नहीं दिए जाते।

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राजनीतिक घोषणाओं पर निशाना

जस्टिस गवई ने दिल्ली चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक दल सत्ता में आने पर हर महीने ₹2100 से ₹2500 तक देने की घोषणा कर रहे हैं, लेकिन जजों की पेंशन और वेतन बढ़ाने पर विचार नहीं किया जाता।

केंद्र सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि मुफ्त योजनाएं एक अस्थायी व्यवस्था हैं, जबकि वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी स्थाई प्रावधान है। उन्होंने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार एक अधिसूचना लाने पर विचार कर रही है, जिससे याचिका में उठाए गए मुद्दों का समाधान हो सके।

सरोगेसी कानून पर समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने सरोगेसी से जुड़े कानूनों के तहत ‘सरोगेट’ माताओं और इच्छुक माता-पिता के लिए निर्धारित आयु सीमा की 11 फरवरी को समीक्षा करने की सहमति जताई।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सरोगेसी विनियमन अधिनियम और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली लगभग 15 याचिकाओं पर सुनवाई की।

सरोगेसी कानून की आयु सीमाएं

कानून के अनुसार:

  • इच्छित मां की आयु: 23 से 50 वर्ष
  • इच्छित पिता की आयु: 26 से 55 वर्ष
  • सरोगेट मां की आयु: 25 से 35 वर्ष, साथ ही विवाहित और एक जैविक बच्चा होना अनिवार्य।

केंद्र सरकार से इन प्रावधानों पर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

नोट: सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए ये दोनों मुद्दे न्याय प्रणाली और सामाजिक संरचना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में क्या निर्णय होंगे, इस पर नजर बनाए रखें।


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