बिहार में शिक्षकों की बड़ी भर्ती योजना: 80,000 से अधिक पदों पर भर्ती

बिहार में शिक्षकों की बड़ी भर्ती योजना: 80,000 से अधिक पदों पर भर्ती

बिहार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने एक नई और बड़ी भर्ती योजना का ऐलान किया है। आगामी टीआरई-4 परीक्षा में 80,000 से अधिक शिक्षकों के पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें टीआरई-3 के खाली रहे 21,397 पद भी शामिल हैं। यह भर्ती योजना बिहार के शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल स्कूलों में शिक्षक की कमी को पूरा करेगी, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएगी।

पिछली भर्तियों का विवरण

पिछली टीआरई (टीचिंग रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन) भर्तियों में कुल 2.81 लाख पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी। इन भर्तियों के लिए 18 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें से 2.55 लाख अभ्यर्थी सफल रहे। इस प्रक्रिया से राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है, और अब नई भर्ती योजना के तहत रिक्त पदों को भरने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।

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बिहार में कुल शिक्षक नियुक्तियों की योजना

बिहार राज्य में कुल 75,000 स्कूलों में 7 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में राज्य के स्कूलों में 5.50 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 1.50 लाख पद अभी भी खाली हैं। इन रिक्त पदों को भरने के लिए आगामी भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार और शिक्षक की कमी को दूर किया जा सकेगा।

विषय-वार भर्तियां

भर्ती प्रक्रिया में विशेष ध्यान गणित, विज्ञान, कंप्यूटर और खेल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दिया जाएगा। इन विषयों के लिए 11 हजार से अधिक शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा, प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के लिए अलग-अलग नियुक्तियां की जाएंगी, ताकि सभी स्तरों पर शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।

टीआरई-3 के बाद की प्रक्रिया

टीआरई-3 परीक्षा के बाद की प्रक्रिया में प्रधानाध्यापक के साथ काउंसलिंग की जाएगी। इसके बाद, स्कूलों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी और फिर टीआरई-4 का काम शुरू होगा। यह प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, ताकि जल्द से जल्द शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके और राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा किया जा सके।

निष्कर्ष

बिहार राज्य में शिक्षकों की भर्ती की यह योजना न केवल शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा कदम है, बल्कि यह लाखों अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगी। टीआरई-4 परीक्षा और इसके बाद की प्रक्रिया से बिहार में शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा और छात्रों को बेहतर शिक्षक मिलेंगे।

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