यूजीसी नेट, पीएचडी बिना भी विश्वविद्यालयों में बन सकेंगे शिक्षक

देश के विश्वविद्यालयों में अब तीन तरह के शिक्षक सेवाएं देंगे

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। इसके तहत अब तीन तरह के शिक्षक सेवाएं देंगे।

नियमित और अस्थायी शिक्षक

नए नियमों के अनुसार, दो तरह के नियमित शिक्षक और एक तरह के अस्थायी शिक्षक होंगे। अस्थायी शिक्षक का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। नियमित शिक्षकों में यूजीसी नेट परीक्षा करने वालों के साथ ही विशेषज्ञ स्नातक शामिल होंगे, जिनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की अनिवार्यता नहीं होगी।

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नए नियमों में छात्रों की सुविधाओं पर ध्यान

नए नियमों में हर तरह के छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है, ताकि वे पढ़ाई को बोझ न समझें। जिन छात्रों को सीखने और समझने की क्षमता कम है उन्हें अपनी सुविधा और पसंद से देरी से डिग्री हासिल करने की छूट होगी, वहीं तेजी से सीखने और समझने वाले 10 फीसदी छात्रों को डिग्री की पढ़ाई जल्द पूरी करने की अनुमति होगी।

शिक्षक बनने के लिए नए नियम

विश्वविद्यालयों में अब शिक्षक बनने के लिए एक ही विषय में यूजी, पीजी व पीएचडी की बाध्यता नहीं होगी। पीएचडी की डिग्री अस्सिटेंट प्रोफेसर से एसोसिएट व प्रोफेसर की पदोन्नति के लिए जरूरी होगी। योग, ड्रामा, फाइन आर्ट्स आदि क्षेत्रों में महारत हासिल स्नातक भी अस्सिटेंट प्रोफेसर बन सकेंगे।

विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी बन सकेंगे शिक्षक

विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विश्वविद्यालयों में 3 वर्ष तक शिक्षक बनकर सेवाएं दे सकेंगे।

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