एकेटीयू में बीटेक और एमटेक अब पांच वर्षों में







एकेटीयू में बीटेक-एमटेक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम

एकेटीयू में बीटेक और एमटेक अब पांच वर्षों में

लखनऊ। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने बीटेक और एमटेक को पांच वर्षों में पूरा करने की योजना शुरू की है। यह नई व्यवस्था छात्रों को समय और संसाधन दोनों बचाने में मदद करेगी।

क्या है बीटेक-एमटेक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम?

वर्तमान में चार वर्षीय बीटेक और दो वर्षीय एमटेक पूरा करने में छह वर्ष लगते हैं।
लेकिन, अब एमटेक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम के जरिए छात्र पांच वर्षों में दोनों डिग्रियां हासिल कर सकते हैं।
इस प्रोग्राम में बीटेक पाठ्यक्रम के कुछ हिस्सों को एमटेक पाठ्यक्रम से जोड़कर इसे एकीकृत किया गया है।

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एमटेक में गिरते दाखिलों को सुधारने की कोशिश

पिछले कुछ वर्षों में एमटेक की सीटों में दाखिलों की संख्या घटी है।
2024 में केवल 50% सीटें ही भर पाईं।
यहां तक कि एकेटीयू के सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (कैश) में भी 90 में से केवल 70 सीटों पर दाखिले हुए।
इस गिरावट का कारण शोध और उच्च शिक्षा में रुचि की कमी को माना जा रहा है।
इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इस समस्या का समाधान हो सकता है।

32 क्रेडिट का मूक्स कोर्स

इंटीग्रेटेड प्रोग्राम में 32 क्रेडिट का कोर्स मूक्स (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) के जरिए पूरा करने की सुविधा दी जाएगी।
छात्रों को बीटेक में पहले पढ़ चुके पाठ्यक्रम को दोबारा नहीं पढ़ना होगा।
इससे पाठ्यक्रम छोटा और अधिक प्रासंगिक होगा।

जुलाई 2025 से प्रवेश प्रक्रिया

जुलाई 2025 से एक वर्षीय एमटेक प्रोग्राम में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
छात्रों को विकल्प मिलेगा कि वे सामान्य बीटेक और एमटेक करें या इंटीग्रेटेड प्रोग्राम चुनें।
यह कदम उच्च शिक्षा और शोध में छात्रों की रुचि बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

कुलपति का बयान

एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा,
“अब चार से पांच वर्षों में बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की जा सकेगी।
वर्तमान में 75% छात्र बीटेक के बाद नौकरी में चले जाते हैं, जबकि शेष 25% में से कुछ स्टार्टअप शुरू करते हैं।
इस नई व्यवस्था से उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलेगा।”

छात्रों के लिए क्यों फायदेमंद?

  • समय की बचत: छह वर्षों की जगह पांच वर्षों में डिग्री।
  • खर्च में कमी: एक वर्ष का समय और फीस बचेगी।
  • शोध और उच्च शिक्षा को बढ़ावा।
  • बीटेक और एमटेक दोनों के बीच बेहतर समन्वय।
बीटेक-एमटेक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है।
यह न केवल छात्रों को समय और संसाधन बचाने में मदद करेगा, बल्कि उच्च शिक्षा और शोध में रुचि बढ़ाने का भी जरिया बनेगा।


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