कृषि रसायनों का दुरुपयोग: आत्महत्या के बढ़ते मामले
कृषि रसायनों का बढ़ता उपयोग और दुरुपयोग
फसलों को अधिक उपजाऊ बनाने और अनाज को सुरक्षित रखने के लिए कृषि रसायनों का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
बाजार में इनकी आसान उपलब्धता के कारण इसका दुरुपयोग भी बढ़ गया है।
एक शोध अध्ययन में पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आत्महत्या का मुख्य कारण कृषि रसायनों का दुरुपयोग है।
यह तथ्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है।
किशोर और युवा सबसे अधिक प्रभावित
शोध के अनुसार, 862 विषाक्तता के मामलों में 328 मामले कृषि रसायनों से संबंधित थे,
जिनका उपयोग आत्महत्या के लिए किया गया। 10 से 30 साल की उम्र के युवाओं में यह समस्या
सबसे अधिक पाई गई, जो 63.11% मामलों का प्रतिनिधित्व करती है।
यह करियर और सामाजिक अपेक्षाओं का संकेत है।
विषाक्तता के मामलों में 61.59% पुरुष और 38.41% महिलाएं शामिल थीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में 62.8% मामले सामने आए, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
शोध में पाया गया कि आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण पारिवारिक विवाद
(26.64%) और आर्थिक समस्याएं (22.94%) थीं। विषाक्तता के मामलों में
एल्युमिनियम फॉस्फाइड (सल्फास) का उपयोग 86.11% रहा।
इसका मुख्य कारण इसका सस्ता और आसानी से उपलब्ध होना है।
आत्महत्या के अधिकांश मामलों में पीड़ितों को सीएचसी और पीएचसी में
प्राथमिक उपचार के बाद एसआरएन अस्पताल में रेफर किया गया।
समाज और स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चिंता
शोध अध्ययन ने यह भी उजागर किया कि प्रयागराज और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में
कृषि रसायनों के दुरुपयोग के कारण आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हो रही है।
यह न केवल समाज के लिए बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय है।
