23 हजार बच्चों को यूनिफार्म नहीं: डीबीटी प्रक्रिया में बाधाएं
कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को यूनिफार्म, स्वेटर, बैग, जूता-मोजा और स्टेशनरी खरीदने के लिए सरकार द्वारा 1200 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाती है। लेकिन इस सत्र में 23,077 बच्चे इस सुविधा से वंचित रह गए हैं।
समस्याओं का मूल कारण
- 8326 बच्चों के अभिभावकों का बैंक खाता सीड (सत्यापित) नहीं है।
- 14751 बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाणपत्र की कमी के कारण आधार पंजीकरण निरस्त हो गया।
प्रभावित बच्चों की स्थिति
गरीब परिवारों के बच्चों को इस समस्या के कारण यूनिफार्म, स्वेटर, बैग, जूता-मोजा नहीं मिल सके हैं। किताबें स्कूलों में निःशुल्क उपलब्ध हो गई हैं, लेकिन अन्य आवश्यक सामान की कमी से बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई
बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने इस समस्या को सुलझाने के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखा है:
- लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम): खातों की सत्यापन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अनुरोध।
- डाक अधीक्षक: डाकघरों को बच्चों के आधार बनाने के लिए निर्देश देने की मांग।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी समस्या
ग्रामीण क्षेत्रों में तहसीलों में जन्म प्रमाणपत्र न बनने के कारण अभिभावकों ने ग्राम प्रधान से प्रमाणपत्र बनवाए। जब ये प्रमाणपत्र आधार अपलोड के लिए उपयोग किए गए, तो यूआईडीएआई ने आवेदन निरस्त कर दिया। इससे बच्चों के खातों में धनराशि स्थानांतरित नहीं हो सकी।
समाधान के प्रयास
प्रशासन और शिक्षक इस समस्या को सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। शिक्षकों ने कई बार बैंक और डाकघरों के चक्कर लगाए, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया धीमी रही। अब समय की कमी को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर काम तेज करने की जरूरत है।
